दिल्ली के सभी निजी स्कूलों पर लागू होंगे शुल्क विनियमन : मंत्री आशीष सूद
प्रीति दिलीप
- 27 Aug 2025, 07:51 PM
- Updated: 07:51 PM
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के सभी 1,700 निजी स्कूल अब फीस विनियमनों के दायरे में आएंगे। इस नियमन का उद्देश्य मनमानी फीस बढ़ोतरी पर अंकुश लगाना है।
सूद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ सेंटर-टू में विधि के छात्रों के साथ बातचीत करते हुए दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के बारे में बताया, जो हाल ही में लागू हुआ है।
उन्होंने कहा कि शुल्क निर्धारण प्रक्रिया में पारदर्शिता, अभिभावकों की भागीदारी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कानून लाया गया है।
मंत्री ने कहा, ‘‘इससे पहले केवल लगभग 300 स्कूल दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम 1973 के तहत विनियमित थे। इन विद्यालयों को डीडीए द्वारा भूमि आवंटित की गई थी। अब सभी निजी स्कूल इस नये कानून के दायरे में आएंगे।’’
उन्होंने बताया कि दिल्ली में करीब 18 लाख बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं।
सूद ने कहा कि कानून में तीन स्तरीय शुल्क विनियमन तंत्र का प्रावधान है, जिसकी शुरुआत स्कूल स्तर पर एक समिति से होगी, जिसमें प्रबंधन, शिक्षक, अभिभावक और एक सरकारी प्रतिनिधि शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि यदि विवाद अनसुलझे रहते हैं, तो मुद्दों को जिला और फिर राज्य स्तरीय समितियों के समक्ष उठाया जा सकता है। सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएंगे और स्वीकृत शुल्क संरचना तीन वर्षों तक मान्य रहेगी।
सूद ने कहा कि फीस बढ़ोतरी के मामले में अभिभावकों के पास वीटो पावर भी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी स्कूल मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। संस्थानों को बदलाव का प्रस्ताव देने से पहले खर्च, सुविधाओं और शिक्षण की गुणवत्ता का ब्योरा देना होगा।’’
अधिनियम के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर प्रति छात्र 50,000 रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और यह हर 20 दिन में दोगुना हो जाएगा। गंभीर मामलों में, मान्यता रद्द भी की जा सकती है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य निजी स्कूलों के कामकाज में हस्तक्षेप करना नहीं है, बल्कि अभिभावकों को अनुचित फीस वृद्धि से बचाना है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह कानून छात्रों और अभिभावकों के हितों की रक्षा के लिए है। इसे शिक्षा विशेषज्ञों, अभिभावकों और हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है।’’
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