प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ : सतीशन
धीरज पवनेश
- 20 Aug 2025, 04:01 PM
- Updated: 04:01 PM
तिरुवनंतपुरम, 20 अगस्त (भाषा)कांग्रेस नेता वी डी सतीशन ने बुधवार को यहां कहा कि प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक भारतीय कानूनों के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है और विपक्ष इसका कड़ा विरोध करेगा।
इस विधेयक में किसी भी मुख्यमंत्री या मंत्री को आपराधिक आरोपों में 30 दिनों के लिए जेल होने पर पद से हटाए जाने का प्रस्ताव किया गया है।
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सतीशन ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि मौजूदा कानूनों के अनुसार, कोई व्यक्ति तभी किसी अपराध का दोषी तब माना जाता है, जब उसे अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है।
सतीशन ने कहा, ‘‘इस विधेयक को पारित करना ही नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है। यह कानून के सिद्धांतों, कानून के मौलिक सिद्धांतों के विरुद्ध है, क्योंकि जब किसी व्यक्ति को लंबी सुनवाई के बाद अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है, तभी वह दोषी माना जाएगा। इससे पहले तक यह भावना बनी रहेगी कि वह एक निर्दोष व्यक्ति है।’’
उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष को किसी व्यक्ति को अदालत में किसी अपराध के लिए संदेह से परे दोषी साबित करना होता है, तभी वह दोषी करार दिया जाता है।
सतीशन ने कहा, ‘‘कोई भी सरकार किसी भी मंत्री के खिलाफ मामला शुरू कर सकती है। विशेष रूप से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) बहुत विवादास्पद है, सीबीआई बहुत विवादास्पद है। वे विपक्ष के किसी भी मुख्यमंत्री या विपक्ष के किसी भी मंत्री के खिलाफ मामला शुरू कर सकते हैं। ईडी के मामलों में अदालत उस व्यक्ति को हिरासत में भेजेगी फिर वह चाहे कोई भी हो।’’
उन्होंने कहा कि यह विधेयक ऐसे मंत्रियों को हटाने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
सतीशन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सरकार ने बुधवार को लोकसभा में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। इस विधेयक में प्रधानमंत्री, मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में लगातार 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहने पर पद से हटाने का प्रावधान है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’ के अलावा ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ पेश किया। बाद में उनके प्रस्ताव पर सदन ने तीनों विधेयकों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया।
भाषा धीरज