संसद ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025 को मंजूरी दी
अविनाश मनीषा अविनाश सुभाष
- 19 Aug 2025, 07:30 PM
- Updated: 07:30 PM
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) संसद ने देश के खनन क्षेत्र के विनियमन और खनिजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के प्रावधानों वाले ‘खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2025’ को मंगलवार को पारित कर दिया।
राज्यसभा में इस विधेयक पर चर्चा तथा कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। लोकसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है।
उच्च सदन में इस विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों के सदस्य मौजूद नहीं थे। विपक्षी सदस्यों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर सदन से बहिर्गमन किया था।
रेड्डी ने विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि इस विधेयक के माध्यम से खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 में छह संशोधन संसद के समक्ष लाए गए हैं जो खान क्षेत्र के हित में हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में अति महत्वपूर्ण (क्रिटिकल) खनिजों की बेहद मांग है और सोलर पैनल से लेकर विंड टर्मिनल तक, बिजली से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक, मोबाइल फोन से लेकर विमानों तक, खेती से लेकर रक्षा और अंतरिक्ष तक, हर क्षेत्र में इनकी जरूरत है।
खान मंत्री ने कहा कि लिथियम जैसे अति महत्वपूर्ण खनिज की आपूर्ति सुगम बनाने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि देश में खनिज उत्पादन को बढ़ाने में इस विधेयक के प्रावधानों से मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने 24 ‘अति महत्वपूर्ण खनिजों’ को शुल्क रहित आयात करने का निर्णय किया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इसके लिए ‘क्रिटिकल मिनरल मिशन’ बनाने की पहल की है।
इस विधेयक के माध्यम से सरकार का लक्ष्य लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ मृदा तत्वों सहित बेहद जरूरी खनिजों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
खान मंत्री रेड्डी ने कहा कि खनन क्षेत्र में सरकार पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ रही है और उत्पादन को बढ़ाया गया है।
उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद की भावना के चलते सभी पक्षों को विश्वास में लिया गया है जिसका परिणाम इस क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव के रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि ‘‘विकसित भारत’’ का लक्ष्य पूरा करने के संकल्प और विश्व में अहम भूमिका निभाने के उद्देश्य के साथ पूरी ईमानदारी के साथ काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा ‘‘2014 से पहले खनन क्षेत्र में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद था और लोगों का भरोसा खत्म हो चुका था। तब नीति पंगुता का दौर था। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। राजग सरकार के अथक प्रयासों का नतीजा है कि आज भारत दूसरा सबसे बड़ा कोयला उत्पादक देश बन चुका है और देश में कोयले का आयात घटा है।’’
रेड्डी ने कहा कि आज स्थिति यह है कि कोयला ब्लॉक का आवंटन निविदा के माध्यम से किया जाता है और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि आज देश में बिजली संकट बिल्कुल नहीं है क्योंकि बिजली के लिए जिस मात्रा में कोयले की जरूरत है, उतना कोयला देने के लिए सरकार तैयार है।
रेड्डी ने कहा, ‘‘वर्तमान सरकार ने क्रांतिकारी सुधार किए हैं, पारदर्शिता और जवाबदेही लाकर कोयला और खनिजों के उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की है।’’
सीमित घरेलू भंडारों के कारण भारत वर्तमान में महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। मंत्री ने खनिज आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार की बहुआयामी रणनीति की चर्चा की।
उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार के तहत खनिज उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि को रेखांकित किया। इस वर्ष पहली बार कोयला उत्पादन एक अरब टन के आंकड़े को पार कर गया जबकि आयात में आठ प्रतिशत की कमी आई, जिससे लगभग 80 लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।
रेड्डी ने कहा कि 2014 से पहले, यह क्षेत्र ‘‘1.86 लाख करोड़ रुपये के घोटाले के साथ भ्रष्टाचार’’ से प्रभावित था। उन्होंने कहा कि ‘‘लाइसेंस आवंटन में पक्षपात और भय के माहौल’’ के साथ पूरी तरह से ‘प्रशासनिक पंगुता’ थी जिसे मौजूदा सरकार ने बदल दिया है।
भाषा
अविनाश मनीषा अविनाश