उच्च न्यायालय के फैसले के बाद मप्र में हिंदुओं ने जश्न मनाया, भोजशाला में हनुमान चालीसा का पाठ किया
दिमो खारी
- 12 Mar 2024, 09:46 PM
- Updated: 09:46 PM
धार (मध्य प्रदेश), 12 मार्च (भाषा) मध्य प्रदेश के धार में मध्यकालीन युग की संरचना भोजशाला को लेकर अदालत के फैसले के एक दिन बाद मंगलवार को कई हिंदू समुदाय के सदस्यों ने इसके परिसर में जश्न मनाया और वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया।
मुस्लिम समुदाय के सदस्य उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को छह सप्ताह के भीतर भोजशाला परिसर का ‘‘वैज्ञानिक सर्वेक्षण’’ करने का निर्देश दिया था। भोजशाला परिसर पर हिंदू और मुस्लिम दोनों अपना दावा करते हैं।
एएसआई द्वारा संरक्षित 11वीं सदी के स्मारक भोजशाला को हिंदू वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित एक मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। सात अप्रैल 2003 को एएसआई द्वारा की गई एक व्यवस्था के अनुसार हिंदू मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा करते हैं, जबकि मुस्लिम शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं।
भोज उत्सव समिति के नेता अशोक जैन ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मंगलवार को लोगों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और भगवान से प्रार्थना की कि यह सर्वेक्षण जल्द पूरा हो और भोजशाला हिंदुओं को दी जाए।
भोज उत्सव समिति के महासचिव सुमित चौधरी ने कहा कि एएसआई सर्वेक्षण की लंबे समय से की जा रही मांग को उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अब जांच से सच्चाई सामने आ जायेगी और भोजशाला अपना गौरव फिर से हासिल कर लेगी।
हिंदू समुदाय के एक अन्य नेता गोपाल शर्मा का कहना है कि लोगों ने अदालत के फैसले पर खुशी व्यक्त की और इसे बड़े उत्साह के साथ मनाया।
उन्होंने कहा, ‘‘ पिछले 32 वर्षों से लगातार हर मंगलवार को सत्याग्रह किया जाता रहा है।’’
उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के कारण भोजशाला मुद्दे की देशभर में चर्चा हो रही है।
इस बीच, एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया जिसमें भोजशाला परिसर में महिलाएं भजन पर नृत्य करती नजर आ रही हैं।
धार के शहर काजी (स्थानीय प्रमुख मौलवी) वकार सादिक ने सोमवार को कहा कि उच्च न्यायालय का फैसला मुस्लिम समुदाय को स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, ‘‘ पूरे सम्मान के साथ हम कहना चाहते हैं कि उच्च न्यायालय का आदेश मुस्लिम समुदाय को स्वीकार्य नहीं है। हमारी समिति जल्द ही इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करेगी।’’
ऐसा समझा जाता है कि एक हिंदू सम्राट राजा भोज ने 1034 ई. में भोजशाला में वाग्देवी की मूर्ति स्थापित की थी। हिंदू समूहों का कहना है कि अंग्रेज इस मूर्ति को 1875 में लंदन ले गए थे।
भाषा दिमो