दिल्ली उच्च न्यायालय ने कांग्रेस के कर संबंधी मामले में फैसला सुरक्षित रखा
सुरेश दिलीप
- 12 Mar 2024, 09:06 PM
- Updated: 09:06 PM
नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने आयकर अपीलीय अधिकरण (आईटीएटी) के उस आदेश को चुनौती देने वाली कांग्रेस पार्टी की याचिका पर मंगलवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के बकाये की वसूली के लिए आयकर विभाग द्वारा जारी नोटिस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की पीठ ने कांग्रेस और आयकर विभाग की दलीलें सुनीं और कहा कि आदेश बुधवार तक आने की संभावना है।
न्यायाधिकरण ने आठ मार्च को पार्टी की उस अर्जी को खारिज कर दिया था, जिसमें उसके खिलाफ बकाया राशि की वसूली के लिये कार्यवाही शुरू करने वाले आयकर विभाग के 13 फरवरी के नोटिस पर रोक लगाने की मांग की गई थी। इसके बाद कांग्रेस ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
आयकर अधिकारी ने आकलन वर्ष 2018-19 के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक का कर चुकाने को कहा था, क्योंकि उस वर्ष पार्टी की आय 199 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी।
कांग्रेस का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने अदालत से आग्रह किया कि पार्टी को कुछ संरक्षण दिया जाये, अन्यथा पार्टी धराशायी हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए अगले कुछ दिनों में अधिसूचना जारी होने की उम्मीद है और पार्टी काफी दबाव में है, क्योंकि उसके बैंक खाते से लेन-देन पर रोक लगा दी गई है।
पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता से कहा कि हालांकि यह कर मांग 2021 में की गयी थी, लेकिन पार्टी ने इस मुद्दे के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाया। इसने कहा कि यह एक ऐसा मामला है, जिसे बहुत ही खराब तरीके से निपटा गया तथा कांग्रेस कार्यालय के लोग 2021 से सो रहे थे।
पीठ ने कहा, ‘‘सिर्फ इसलिए कि किसी ने आपको फरवरी में नोटिस देने का फैसला किया, तथ्य नहीं बदल जाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि अपीलीय अधिकरण ने एक संतुलित और प्रशंसनीय दृष्टिकोण अपनाया है।
आईटी विभाग का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता ज़ोहेब हुसैन ने दलील दी कि हालांकि कांग्रेस को 2021 में कर देनदारी का 20 प्रतिशत भुगतान करने का विकल्प दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हुसैन ने कहा कि यदि आयकर दाता पेशकश के समय कर मांग का 20 प्रतिशत जमा करने की सुविधा का लाभ नहीं उठाता है, तो पूरी राशि वसूली योग्य हो जाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी धारणा बनाई जा रही है कि आयकर विभाग चुनाव से ठीक पहले कर की वसूली कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह एक नियमित प्रक्रिया है। इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है।’’
आयकर विभाग की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मूल कर मांग 102 करोड़ रुपये थी और ब्याज के साथ यह 135.06 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने कहा कि अब तक 65.94 करोड़ रुपये वसूल किये जा चुके हैं।
कांग्रेस के वकील ने कहा कि आयकर अधिकारियों ने पार्टी के पिछले 7-8 वर्षों के कर मूल्यांकन को फिर से खोल दिया है।
भाषा सुरेश