राष्ट्रीय राजधानी में धूल भरी आंधी के बाद वायु गुणवत्ता खराब हुई
राखी माधव
- 15 May 2025, 04:58 PM
- Updated: 04:58 PM
नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में रातभर चली धूल भरी आंधी के बाद बृहस्पतिवार सुबह दिल्ली-एनसीआर में धूल की एक मोटी परत छा गई, जिससे दृश्यता कम हो गई और वायु गुणवत्ता में गिरावट आ गई।
मौसम विभाग ने बताया कि उत्तरी पाकिस्तान से धूल पंजाब और हरियाणा होते हुए दिल्ली-एनसीआर की ओर बढ़ रही है, जो दोनों राज्यों में चल रही तेज पश्चिमी हवाओं के कारण बढ़ रही है।
हालांकि, यह धूल धीरे-धीरे पूर्व की ओर बढ़ रही है जिससे क्षेत्र में दृश्यता में सुधार हो रहा है। पालम में वर्तमान में दृश्यता 4,000 मीटर बताई जा रही है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, धूल भरी आंधी 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली तेज हवाओं के कारण आई।
आंधी के बाद बुधवार रात 10 बजे से 11:30 बजे तक आईजीआई हवाई अड्डे पर दृश्यता 4,500 मीटर से घटकर 1,200 मीटर रह गई थी।
तूफान के बाद से, हवा तीन से सात किमी प्रति घंटे की गति से चल रही है जिससे धूल के कणों का फैलाव रुक गया है। इसके परिणामस्वरूप, दृश्यता खराब बनी हुई है, जो सफदरजंग और पालम हवाई अड्डों पर 1,200 से 1,500 मीटर के बीच कम-ज्यादा हो रही है।
धूल भरी आंधी ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता को प्रभावित किया और पिछले कुछ सप्ताहों तक मध्यम श्रेणी में रहने के बाद वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में पहुंच गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, सुबह आठ बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 236 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में है।
मौसम विभाग ने दिन में तेज हवाएं चलने का अनुमान जताया है।
लोक नायक अस्पताल (एलएनजेपी) के एक चिकित्सक ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि दिल्लीवासियों को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि धूल लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकती है। धूल के कण फेफड़ों में गहराई तक जा सकते हैं, जिससे संभावित रूप से फेफड़ों की गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
उन्होंने आगे सुझाव दिया कि ऐसी धूल भरी आंधी के दौरान बाहर निकलने से बचें तथा सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
चिकित्सक ने कहा, "मास्क धूल के कणों को छानने में मदद कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अच्छी तरह से फिट होना चाहिए। खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखें या घर पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें। अपनी आँखों को रगड़ने से बचें क्योंकि इससे चोट लग सकती है। अगर जलन हो, तो सादे पानी से आँखों को अच्छी तरह धोएँ। खूब पानी पिए"
पीएम 2.5 और पीएम 10 कणों को उनके सांस लेने योग्य आकार के कारण खतरनाक माना जाता है। धूल के कणों से भरी हवा में सांस लेने से अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जो जोखिम के स्तर और अवधि पर निर्भर करती हैं।
भाषा
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