बराक घाटी में नागरिकता बड़ा मुद्दा, सीएए इसे हल करने की कुंजी: परिमल शुक्लाबैद्य
नरेश नरेश अमित
- 23 Apr 2024, 01:46 PM
- Updated: 01:46 PM
(दुर्बा घोष)
सिलचर (असम), 23 अप्रैल (भाषा) सिलचर (आरक्षित) लोकसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार और असम के मंत्री परिमल शुक्लाबैद्य ने कहा कि बराक घाटी के दो लोकसभा क्षेत्रों में नागरिकता एक बड़ा मुद्दा रहा है और सीएए इसे हल करने में काफी मदद करेगा।
शुक्लाबैद्य ने एक साक्षात्कार में ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि भाजपा ने एक कानून लाने के लिए कदम उठाया, जिससे बांग्लादेश से घाटी में आए लोगों को मदद मिलेगी।
दोनों निर्वाचन क्षेत्र बांग्लादेश के साथ 129 किलोमीटर की सीमा साझा करते हैं और पड़ोसी देश से विस्थापित हिंदू बंगालियों की एक बड़ी आबादी है जो समय समय पर घाटी में आकर बस गए।
आबकारी, परिवहन और मत्स्य पालन मंत्री शुक्लाबैद्य ने कहा,“नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को संसद द्वारा एक कानून के रूप में अधिनियमित किया गया था, लेकिन नियम तैयार होने के तुरंत बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो गई और इस संबंध में ज्यादा काम नहीं किया जा सका,” ।
उन्होंने दावा किया कि नागरिकता की समस्या विभाजन के कारण पैदा हुई और 70 साल तक किसी भी राजनीतिक दल ने इसे हल करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।
भाजपा नेता ने कहा, “यह सच है कि कुछ लोगों को ऑनलाइन आवेदन करना मुश्किल हो रहा है और दस्तावेज़ जमा करने से संबंधित मुद्दे हैं, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मामले से अवगत कराया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आचार संहिता हटने के बाद प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा।’’
शुक्लाबैद्य ने कहा, ‘‘इसके कार्यान्वयन में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, लेकिन हम उन्हें हल करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’’ उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल इस मामले पर ‘अनावश्यक शोर’ मचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के सहयोग से अगले छह से आठ महीनों में सभी बाधाओं को दूर कर लिया जाएगा।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि कई लोग सीएए पोर्टल पर आवेदन नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें यह साबित करने के लिए बांग्लादेश द्वारा जारी प्रासंगिक दस्तावेज अपलोड करने होंगे कि वे उस देश से विस्थापित हुए हैं।
भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि बराक घाटी में संचार और कनेक्टिविटी अन्य प्रमुख मुद्दे हैं।
शुक्लाबैद्य ने कहा कि वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ही थे जिन्होंने सिलचर से गुजरात तक ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए पहल की थी लेकिन उसके बाद 10 साल तक कांग्रेस सरकार सत्ता में रही और उसने इस परियोजना की 'उपेक्षा' की।
उन्होंने कहा, “2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने फिर से पहल की और परियोजना पूरी होने वाली है। इससे राज्य की राजधानी तक यात्रा के समय को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।’’
मंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार यहां एक 'मिनी सचिवालय' भी स्थापित कर रही है, जो 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पूरा हो जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान, बराक घाटी की मुख्य आधार कछार पेपर मिल बंद कर दी गई लेकिन असम में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, ‘‘हमने कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया, उन्हें उनके बकाये का भुगतान किया।’’
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