उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीट पर 54 फीसदी से ज्यादा मतदान
दीप्ति दीप्ति नोमान
- 19 Apr 2024, 11:46 PM
- Updated: 11:46 PM
देहरादून, 19 अप्रैल (भाषा) उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीट पर शुक्रवार को 54 प्रतिशत से ज्यादा मतदान दर्ज हुआ जो 2019 के आम चुनाव में हुए मतदान से करीब पांच प्रतिशत कम रहा ।
वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनावों में उत्तराखंड में 61.48 प्रतिशत मतदान हुआ था ।
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश की पांचों लोकसभा सीट पर 54.22 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया । प्रदेश में एक ही चरण में मतदान हुआ ।
हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि मतदान प्रतिशत के अंतिम आंकड़े बाद में जारी किए जाएंगे क्योंकि कुछ मतदान केंद्रों से रिपोर्ट पहुंचने में समय लग रहा है जबकि इसमें डाक मतपत्रों की संख्या भी शामिल नहीं है ।
मतदान के लिए प्रदेश के 13 जिलों में 11,729 मतदान केंद्र बनाए गए थे । पूरे प्रदेश में मतदान सुचारू रूप से हुआ और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है ।
हालांकि, हरिद्वार में एक बुजुर्ग मतदाता ने चुनाव में मतपत्रों का इस्तेमाल नहीं किए जाने के विरोध में ईवीएम जमीन पर पटक दी । मानसिक रूप से अस्वस्थ बताए जा रहे 70 वर्षीय रणधीर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया लेकिन कुछ घंटों बाद उसे छोड़ दिया गया ।
सर्वाधिक मतदान नैनीताल-उधमसिंह नगर संसदीय सीट पर हुआ जहां पांच बजे तक 59.99 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला। हरिद्वार सीट पर 59.12 फीसदी, टिहरी सीट पर 51.74 फीसदी, पौड़ी गढ़वाल सीट पर 49.93 फीसदी एवं अल्मोड़ा में 45.39 प्रतिशत मतदान हुआ।
सुबह सात बजे से शाम पांच बजे तक चले मतदान के बाद प्रदेश की पांच लोकसभा सीट पर 55 प्रत्याशियों की राजनीतिक किस्मत ईवीएम में कैद हो गयी जिसका परिणाम चार जून को सामने आएगा । प्रदेश में 83 लाख से ज्यादा मतदाता हैं ।
प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में कुछ गांवों ने आधारभूत सुविधाओं जैसे सड़क के अभाव में मतदान का बहिष्कार भी किया । पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में आने वाले चमोली जिले के आठ गांवों तथा अल्मोड़ा लोकसभा सीट के तहत चंपावत जिले के दो गांवों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया ।
चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने कहा कि ग्रामीणों को मतदान के लिए मनाने का प्रयास किया गया लेकिन वे बहिष्कार की अपन मांग पर अडिग रहे ।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और योग गुरू रामदेव प्रदेश में सबसे पहले मतदान करने वालों में शामिल रहे । धामी ने उधमसिंह नगर जिले के खटीमा में नागर तराई मतदान केंद्र में मतदान किया। अपनी मां और पत्नी गीता के साथ मतदान के लिए पहुंचे धामी केंद्र में कतार में खड़े रहे और अपनी बारी की प्रतीक्षा की ।
मतदान कर बाहर निकले धामी ने सभी मतदाताओं से वोट जरूर डालने की अपील की । उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लोगों में काफी उत्साह है।
धामी ने कहा, ‘‘पिछले 10 वर्षों में, उत्तराखंड ने अभूतपूर्व विकास देखा है। सभी वर्गों के लोगों को इससे लाभ हुआ है। वे (प्रधानमंत्री) नरेन्द्र मोदी को तीसरा कार्यकाल देने के लिए मतदान जरूर करेंगे।’’
उन्होंने भाजपा के संकल्प पत्र के बारे में भी बात की, जिसमें उत्तराखंड विधानसभा द्वारा पारित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की तरह ही देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता रेखांकित की गई है।
धामी ने कहा, ''उत्तराखंड से निकली यूसीसी की गंगा पूरे देश में बहेगी।''
रामदेव ने अपने सहयोगी आचार्य बालकृष्ण के साथ हरिद्वार के कनखल क्षेत्र में दादूबाग मतदान केंद्र पर वोट डाला ।
मतदान के बाद उन्होंने कहा कि भारत को आर्थिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए उन्होंने वोट डाला।
वर्ष 2014 और 2019 में राज्य की पांचों लोकसभा सीट पर जीत का परचम फहराने वाली सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस बार भी पुराना प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद है जबकि कांग्रेस को आशा है कि वह अपनी खोई राजनीतिक जमीन फिर हासिल कर लोगी ।
भाजपा ने नैनीताल से अजय भट्ट, अल्मोड़ा से अजय टम्टा और टिहरी से मालराज्य लक्ष्मी शाह पर दोबारा भरोसा जताया है जबकि हरिद्वार से उसने रमेश पोखरियाल निशंक की जगह पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पौड़ी गढ़वाल से तीरथ सिंह रावत की जगह पार्टी प्रवक्ता अनिल बलूनी पर दांव लगाया है।
कांग्रेस ने पौड़ी गढ़वाल से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, हरिद्वार से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पुत्र वीरेंद्र रावत, टिहरी से जोत सिंह गुनसोला, नैनीताल से प्रकाश जोशी और अल्मोड़ा से प्रदीप टम्टा को अपना प्रत्याशी बनाया है। प्रदीप टम्टा को छोड़कर अन्य सभी चारों प्रत्याशी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
चुनाव में अन्य दलों सहित निर्दलीय प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं लेकिन हर बार की तरह इस बार भी सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच ही है।
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