भोजन को लेकर ईडी का रुख ‘संकीर्णता’ और ‘राजनीति’ वाला: केजरीवाल के वकील ने अदालत में कहा
देवेंद्र सुरेश
- 19 Apr 2024, 09:04 PM
- Updated: 09:04 PM
नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रवर्तन निदेशालय पर जेल में उनके आहार को लेकर ‘संकीर्ण’ सोच रखने और राजनीति करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को एक अदालत के समक्ष कहा कि उन्होंने जो खाना खाया वह उनके डॉक्टर द्वारा तैयार किए गए आहार चार्ट के अनुरूप था और उन्होंने जेल में उन्हें इंसुलिन दिये जाने का अनुरोध किया।
केजरीवाल ने उनकी शर्करा के ‘‘खतरनाक’’ स्तर को नियंत्रण में रखने के वास्ते इंसुलिन दिये जाने की अनुमति देने का निर्देश जेल अधिकारियों को देने के लिए अदालत के समक्ष एक नई याचिका दायर की।
उनके वकील वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने इसे ‘‘चौंकाने वाला’’ और ‘‘खतरनाक’’ बताते हुए कहा कि केजरीवाल को उनकी गिरफ्तारी के बाद से उनके शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन नहीं दिया गया है।
सिंघवी ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता पिछले 22 वर्ष से मधुमेह से पीड़ित है। वर्ष 2012 से उन्हें प्रतिदिन इंसुलिन दिया जा रहा है। एक फरवरी, 2024 से चिकित्सा निगरानी के तहत, आवेदक ‘इंसुलिन रिवर्सल प्रोग्राम’ (आईआरपी) शुरू करने में सक्षम हो पाये थे और उन्हें इंसुलिन दिया जाना बंद कर दिया गया था। गिरफ्तारी के कारण, आवेदक (केजरीवाल) उक्त आईआरपी का पालन करने में असमर्थ हैं और उन्हें इंसुलिन देने की जरूरत है।’’
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को अदालत के समक्ष दावा किया था कि केजरीवाल चिकित्सा आधार पर जमानत के लिए जेल में प्रतिदिन आम और मिठाई जैसे उच्च शर्करा वाले आहार ले रहे हैं, जबकि उन्हें ‘टाइप-2’ डायबिटीज है।
एजेंसी ने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक शर्करा वाला भोजन कर रहे हैं ताकि वह अस्वस्थ हो जाएं और चिकित्सा आधार पर जमानत मांग सकें।
केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने अदालत से कहा, ‘‘ईडी ने दावा किया है कि मेरे मुवक्किल जमानत पाने के लिए अपना रक्त शर्करा का स्तर बढ़ाना चाहते हैं। मैं क्या जमानत पाने के लिए लकवा होने का जोखिम उठाऊंगा? मैं जो भी भोजन कर रहा हूं वह गिरफ्तारी से पहले मेरे डॉक्टर द्वारा तैयार आहार चार्ट के अनुसार है।’’
केजरीवाल के जेल में नियमित रूप से आम, मिठाई, आलू-पूरी खाने के ईडी के दावे पर उन्होंने कहा कि उन्हें एक-दो बार ही ऐसा भोजन दिया गया।
सिंघवी ने अदालत से कहा, ‘‘आरोप है कि मैं आम खा रहा हूं... घर से 48 बार भोजन भेजा गया, जिसमें से केवल तीन बार आम भेजे गए। आठ अप्रैल के बाद कोई आम नहीं भेजा गया। आम को तो ऐसे दर्शाया गया है जैसे उसमें शुगर भरी पड़ी है। उसमें शर्करा का स्तर ‘ब्राउन राइस’ या सफेद चावल से बहुत कम होता है।’’
केजरीवाल को जेल में घर के खाने की अनुमति दी गई है।
उन्होंने अदालत से कहा, ‘‘मैं केवल ‘शुगर फ्री’ चाय लेता हूं। ईडी कितनी संकीर्ण, राजनीतिक और हास्यास्पद हो सकती है। उनके बयान पूरी तरह झूठे और दुर्भावनापूर्ण हैं। आपका मीडिया में बहुत ज्यादा प्रभाव है, केवल इसलिए आप यह प्रकाशित करा रहे हैं कि मैं आलू-पूड़ी खा रहा हूं, जबकि ऐसा भोजन केवल एक बार पूजा के समय भेजा गया था।’’
केजरीवाल ने अपने शर्करा के स्तर में उतार-चढ़ाव के बारे में सप्ताह में तीन बार अपने चिकित्सक से परामर्श लेने की याचिका बृहस्पतिवार को वापस ले ली थी। उन्होंने शुक्रवार को एक नयी याचिका दायर कर हर दिन 15 मिनट के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श की मांग की।
सिंघवी ने कहा, ‘‘क्योंकि मैं कैदी हूं, इसलिए क्या मुझे गरिमापूर्ण जीवन जीने और अच्छी सेहत का अधिकार नहीं है? मैं क्या कुख्यात अपराधी हूं जो मुझे 15 मिनट भी अपने डॉक्टर से वीडियो कॉन्फ्रेंस से परामर्श की अनुमति नहीं दी जा सकती? हमारे देश में 75 साल से लोकतंत्र है, लेकिन मैं इस तरह का रुख पहली बार देख रहा हूं। इस तरह की संकीर्णता पहले कभी नहीं देखी।’’
उन्होंने इंसुलिन देने से इनकार किये जाने को ‘‘जीवन और स्वस्थ जीवन जीने के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन’’ और साथ ही ‘‘जेल अधिकारियों द्वारा की गई गंभीर चिकित्सा लापरवाही’’ बताया।
सिंघवी ने दावा किया कि जेल अधिकारियों ने अदालत को ऐसा कोई दस्तावेज नहीं सौंपा है जो सटीक रूप से यह बता सके कि उन्होंने वास्तव में क्या खाया था।
ईडी ने सिंघवी की दलीलों का विरोध करते हुए दावा किया कि केजरीवाल जो खाना खा रहे थे वह उनके डॉक्टर द्वारा निर्धारित आहार चार्ट से मेल नहीं खाता।
एजेंसी ने कहा कि तिहाड़ जेल में केजरीवाल की मधुमेह से देखभाल के लिए पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं थीं।
ईडी की दलीलों का वरिष्ठ वकील रमेश गुप्ता ने विरोध किया। गुप्ता भी केजरीवाल की ओर से पेश हुए थे।
वकील ने अदालत से कहा, ‘‘इस सुनवाई से ईडी का क्या लेना-देना है? वह (ईडी) कोई पक्षकार नहीं है। यह मेरे और जेल तथा अदालत के बीच का मामला है? उनका ‘मीडिया ट्रायल’ किया जा रहा है और प्रेस जो चाहे प्रकाशित कर रही है।’’
अदालत ने अपने डॉक्टर से प्रतिदिन परामर्श के अनुरोध संबंधी केजरीवाल की याचिका पर सोमवार तक अपना आदेश सुरक्षित रख लिया और तिहाड़ जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि जरूरी हो तो शनिवार तक जवाब दाखिल करें।
भाषा
देवेंद्र