तेल-तिलहन कीमतों में मिला जुला रुख
राजेश राजेश रमण
- 19 Apr 2024, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
नयी दिल्ली, 19 अप्रैल (भाषा) मलेशिया एक्सचेंज में गिरावट और शिकागो एक्सचेंज में घट बढ़ जारी रहने के बीच शुक्रवार को देश के तेल तिलहन बाजारों में कारोबार का मिला जुला रुख दिखा।
एक ओर जहां किसानों के नीचे भाव में बिकवाली नहीं करने और कम उपलब्धता के कारण मूंगफली तेल तिलहन में सुधार दिखा वहीं कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन के सोयाबीन से सस्ता होने के बाद इन तेलों का आयात बढ़ने की उम्मीदों के बीच सोयाबीन तेल तिलहन तथा सीपीओ एवं पामोलीन तेल कीमतों में गिरावट दर्ज की गयी। आवक कम रहने के बीच सरसों तेल तिलहन और बिनौला तेल के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए।
मलेशिया एक्सचेंज में दोपहर 3.30 बजे लगभग 1.25 प्रतिशत की गिरावट थी जबकि शिकागो एक्सचेंज में घट बढ़ का रुख रहा।
बाजार सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन डीगम से दाम कम होने के बाद अगले महीने सीपीओ और पामोलीन तेल का आयात बढ़ने की संभावना और कम आपूर्ति की स्थिति सुधरने की उम्मीदों के बीच लिवाली का स्तर कम रहने से पाम, पामोलीन के साथ साथ सोयाबीन तेल तिलहन के दाम गिरावट के साथ बंद हुए।
उन्होंने कहा कि बाजार में मूंगफली की उपलब्धता की कमी है क्योंकि किसान नीचे भाव पर मूंगफली बेचना नहीं चाहते। मूंगफली पेराई करने में तेल मिल वालों को नुकसान उठाना पड़ रहा है और ऊंचा दाम होने तथा आयातित खाद्यतेलों के सस्ते थोक दाम ने बाजार की धारणा को इस कदर तोड़ा हुआ है कि एमएसपी के हिसाब से ऊंची लागत वाली मूंगफली तेल, किसी सूरत में बाजार में खपने की स्थिति में नहीं है। बाजार में कम उपलब्धता के कारण मूंगफली तेल तिलहन में सुधार दिखा।
मंडियों में सरसों और बिनौले की आवक कम है। बिनौले के लगभग 75 प्रतिशत पेराई मिलें और सरसों की लगभग 65 प्रतिशत तेल मिलें बंद हो चुकी हैं। आयातित खाद्यतेलों के सस्ते थोक दाम रहने तथा किसानों द्वारा कम दाम पर बिकवाली नहीं करने एवं खुदरा मांग होने के बीच सरसों तेल तिलहन और बिनौलातेल के भाव पूर्वस्तर पर ही बंद हुए।
सूत्रों के अनुसार बड़ी कंपनियों का दावा है कि उन्होंने मार्च में खुदरा कारोबार में उपभोक्ताओं को खाद्यतेल किफायती दर पर उपलब्ध करायी है। जबकि वास्तविकता यह है कि थोक में विशेषकर सोयाबीन डीगम और सूरजमुखी तेल बंदरगाहों पर लगभग 10 प्रतिशत के प्रीमियम दाम के साथ बेचा गया। जो थोक में रियायत नहीं देते उनसे खुदरा में रियायत की क्या उम्मीद की जा सकती है।
उन्होंने कहा सरकार की ओर से भी मॉल और बड़ी दुकानों में खाद्यतेलों के खुदरा दाम का जायजा लेना होगा कि खाद्यतेल किस भाव से बिक रहे हैं और बड़ी कंपनियों के दावे महज कागजी दावे तो नहीं हैं?
सूत्रों ने कहा कि लगभग दो साल से देशी तेल पेराई मिलें नुकसान में चल रही हैं लेकिन इन सब बातों का कोई आंकड़ा देने वाला नहीं है। उपभोक्ताओं को क्या भाव तेल मिल रहा है, इसकी जानकारी कोई संगठन नहीं देता। ऐसा लगता है कि सभी को सिर्फ थोक दाम में आई गिरावट से मतलब हैं, उपभोक्ताओं को महंगा या सस्ता खाद्यतेल मिल रहा है, इसमें किसी को रुचि रखनी चाहिये और खाद्यतेल समुचित दाम पर मिले इसकी भरपूर कोशिश होनी चाहिये।
सूत्रों ने कहा कि नकली खल के कारोबार ने बिनौला को पस्त किया हुआ है। मूंगफली किसानों और बिनौला किसानों की दुर्गति को देखते हुए आने वाले समय में इन फसलों की खेती प्रभावित होने का जोखिम है। इस ओर ध्यान देने की जरुरत है।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,235-5,275 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,160-6,435 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,820 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,245-2,510 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,685-1,785 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,685 -1,800 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,800 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,570 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 9,025 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,775 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,300 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 4,775-4,795 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,575-4,615 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,075 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश