संदेशखालि मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने को ईरानी ने न्याय की दिशा में पहला कदम बताया
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र नरेश
- 10 Apr 2024, 06:38 PM
- Updated: 06:38 PM
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नेता और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के संदेशखालि में महिलाओं के खिलाफ अपराधों और जमीन कब्जा करने के आरोपों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत किया और कहा कि यह पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में पहला कदम है।
मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवज्ञानम की अगुवाई वाली खंडपीठ ने कहा कि जांच अदालत की निगरानी में की जाएगी। साथ ही, उन्होंने सीबीआई को राजस्व रिकॉर्ड का गहन निरीक्षण और कथित रूप से भू-उपयोग परिवर्तन का निरीक्षण करने के बाद एक व्यापक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
आरोपों के अनुसार, मछली पालन के लिए कृषि-जोत भूमि के उपयोग को जल निकायों में अवैध रूप से परिवर्तित किया गया।
अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह संदेशखालि में महिलाओं के खिलाफ अपराध और जमीन हड़पने के आरोपों की जांच करे और सुनवाई की अगली तारीख पर एक व्यापक रिपोर्ट पेश करे।
ईरानी ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘मैं अदालत के आदेश का स्वागत करती हूं। संदेशखालि की महिलाओं और खासकर गरीब महिलाओं को न्याय दिलाने की दिशा में यह पहला कदम है।’’
तृणमूल कांग्रेस के कद्दावर नेता शाहजहां शेख संदेशखालि में कथित यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने के मामलों में एक प्रमुख आरोपी हैं। उन्हें राशन वितरण घोटाला मामले की जांच के तहत पांच जनवरी को इलाके में छापेमारी कर रहे प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों पर हमले के सिलसिले में फरवरी में गिरफ्तार किया गया था।
तृणमूल कांग्रेस ने शेख को गिरफ्तारी के कुछ घंटे बाद ही उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था।
ईरानी ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संविधान को नहीं बल्कि शेख को बचा रही हैं। भाजपा की वरिष्ठ नेता ने कहा कि अब उन्हें राज्य के लोगों को जवाब देना होगा।
ईरानी ने कहा, ‘‘मैं अदालत के फैसले के प्रति आभार व्यक्त करना चाहती हूं।’’
उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई संदेशखालि मामले के पीड़ितों को न्याय दिलाने में मदद करेगी।
याचिकाकर्ता-वकील प्रियंका टिबरीवाल द्वारा हलफनामे के रूप में लगभग 600 शिकायतें अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई थीं, जिनमें कथित तौर पर यौन अत्याचार, भूमि पर कब्जा, हमले और संपत्ति को नष्ट करने जैसे अन्य अपराध शामिल हैं।
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र