मलयालम फिल्म ‘मार्को’ को सेटेलाइट प्रसारण अधिकार नहीं मिलेंगे
शफीक प्रशांत
- 05 Mar 2025, 03:25 PM
- Updated: 03:25 PM
तिरुवनंतपुरम, पांच मार्च (भाषा) मलयालम भाषा में अब तक बनी सबसे हिंसक फिल्म कही जाने वाली “मार्को” को सेटेलाइट प्रसारण अधिकार नहीं मिलेंगे क्योंकि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के क्षेत्रीय कार्यालय ने टीवी अधिकार प्राप्त करने के लिए ‘ए’ प्रमाणपत्र से ‘यूए’ श्रेणी में बदलने के लिए इसके निर्माताओं की अर्जी को खारिज कर दिया है।
सीबीएफसी के क्षेत्रीय अधिकारी टी. नदीम थुफाली ने बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि क्षेत्रीय परीक्षण समिति ने 19 फरवरी को श्रेणी परिवर्तन के लिए “मार्को” निर्माताओं के आवेदन को खारिज कर दिया था।
उन्नी मुकुंदन अभिनीत यह फिल्म पिछले साल 20 दिसंबर को रिलीज हुई थी। ‘ए’ प्रमाणपत्र वाली यह फिल्म इस श्रेणी की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में से एक है। यह फिल्म 14 फरवरी से ओटीटी मंच ‘सोनीलिव’ पर उपलब्ध है।
सीबीएफसी ‘यू’ प्रमाणपत्र उन फिल्मों के लिये जारी करता है जिनके सार्वजनिक प्रदर्शन पर कोई प्रतिबंध न हो। ‘ए’ प्रमाणपत्र प्राप्त फिल्में केवल वयस्क दर्शकों के लिये होती हैं जबकि ‘यूए’ प्रमाणपत्र वाली फिल्मों को 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे माता-पिता के मार्गदर्शन में ही देख सकते हैं।
थुफाली ने कहा कि सेटेलाइट अधिकार ‘यू’ या ‘यूए’ प्रमाणपत्र वाली फिल्मों को दिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मों को उनकी सामग्री के आधार पर वर्गीकृत और प्रमाणपत्र दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि अभिभावकों को यह सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहना चाहिए कि उनके बच्चे अत्यधिक हिंसा वाली फिल्में न देखें।
थुफाली ने कहा कि समिति ने केंद्र को औपचारिक सिफारिश की है कि फिल्म को ओटीटी मंच पर भी प्रतिबंधित किया जाए। उन्होंने कहा, “हालांकि, सीबीएफसी के पास ओटीटी स्ट्रीमिंग के संबंध में कोई नियामक शक्तियां नहीं हैं।”
सेंसर बोर्ड के सदस्य जी.एम. महेश ने कहा कि कई नागरिकों द्वारा शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सीबीएफसी के पास ओटीटी मंच पर निगरानी की भी शक्ति है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इसलिए हमने मंत्री स्तर पर औपचारिक अनुरोध किया है।’’
हनीफ अदेनी द्वारा लिखित और निर्देशित ‘‘मार्को’’ को राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र की हस्तियों ने हिंसा का महिमामंडन और युवाओं को गुमराह करने वाली फिल्म करार दिया है। इन हस्तियों ने केरल में हाल के दिनों में अपराध की बढ़ती घटनाओं के संदर्भ में यह दावा किया है।
इस बीच, फिल्म के निर्माता शरीफ मोहम्मद ने फिल्म का बचाव करते हुए कहा कि लेखक-निर्देशक को स्क्रीन पर वही दिखाना चाहिए जो फिल्म के विषय के लिए जरूरी है।
उन्होंने कहा, ‘‘सिनेमा को नहीं, बल्कि हमारे नजरिए को बदलना चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि ‘‘मार्को’’ ऐसी पहली फिल्म नहीं है जिसमें स्क्रीन पर हिंसा दिखाई गई है।
भाषा शफीक