40 फीसदी से ज्यादा कैब चालक, आपूर्ति करने वाले काम के दौरान होते हैं हिंसा का शिकार : सर्वेक्षण
जितेंद्र माधव
- 11 Mar 2024, 06:54 PM
- Updated: 06:54 PM
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) करीब 47 फीसदी कैब चालक और सेवा प्रदाता कंपनी के 41.5 फीसदी प्रतिनिधियों को काम करते वक्त किसी न किसी प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से बहुत से प्रतिनिधियों ने 10 मिनट के भीतर सामान पहुंचाने वाली नीति को खत्म करने की मांग की है। एक सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
बहुत सी कंपनियां ऑर्डर करने के 10 मिनट के भीतर सामान नहीं पहुंचने पर आकर्षक छूट या सामान मुफ्त देने की पेशकश करती हैं।
महाराष्ट्र के पुणे में पिछले वर्ष अक्टूबर में हुई एक घटना में एक ग्राहक ने पिज्जा पहुंचाने में देरी के लिए पिज्जा कंपनी के प्रतिनिधि की पिटाई की थी और उसे धमकाने के लिए हवा में गोली चलाई थी।
'पैगाम' नाम के गैर सरकारी समूह (एनजीओ) द्वारा किये गये एक सर्वेक्षण के मुताबिक, 41.5 फीसदी उत्तरदाताओं ने काम के वक्त हिंसा के शिकार होने की सूचनाएं दीं।
सर्वेक्षण में दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, इंदौर, मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु सहित आठ राज्यों में अप्रैल 2022 से 2023 के बीच 10 हजार गिग और ऐप-आधारित चालकों व सेवा प्रदाता कंपनी के प्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया गया।
सर्वेक्षण में ऐप-आधारित चालकों और प्रतिनिधियों के सामने आने वाली चुनौतियों को रेखांकित किया गया, जो रोजगार की कमी, नौकरी की असुरक्षा, कानूनी सुरक्षा संबंधी समस्या, आय अस्थिरता, हिंसा और भेदभाव से जूझ रहे हैं।
सर्वेक्षण के अनुसार, 72 प्रतिशत ऐसे प्रतिनिधि प्रति माह 15 हजार रुपये से कम कमाई में अपने खर्चों को पूरा करने की समस्या से जूझ रहे हैं।
सर्वेक्षण के मुताबिक, ''83 फीसदी कैब चालक प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक काम करते हैं जबकि 31 प्रतिशत चालक रोजाना 14 घंटे से अधिक काम करते हैं फिर भी 72 प्रतिशत कामगारों को प्रति माह 15 हजार रुपये से कम की कमाई में घर चलाना मुश्किल होता है।''
लंबे समय तक काम करने से इन लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लगभग 93.3 प्रतिशत कैब चालकों ने जोड़ों के दर्द, पीठ दर्द सहित शरीर में दर्द जैसी समस्याओं की शिकायत की। वहीं सेवा प्रदाता कंपनी के 98.5 प्रतिशत प्रतिनिधियों ने कहा कि वे चिंता, अवसाद, तनाव और चिड़चिड़ेपन जैसी समस्याएं महसूस करते हैं।
इसके अलावा ग्राहकों का खराब व्यवहार 68 प्रतिशत प्रतिनिधियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
शोध निदेशक आकृति भाटिया ने कहा कि प्रतिनिधियों और ऐप-आधारित चालकों को कर्मचारी के रूप में माना जाना चाहिए और कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चालकों को न्यूनतम वेतन मिले।
भाषा जितेंद्र