केआईआईटी विवाद: पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद छात्रा का शव परिवार को सौंपा, जांच दल का गठन
जोहेब माधव
- 18 Feb 2025, 08:14 PM
- Updated: 08:14 PM
भुवनेश्वर, 18 फरवरी (भाषा) ओडिशा पुलिस ने मंगलवार को भुवनेश्वर के एम्स में पोस्टमार्टम के बाद नेपाली छात्रा का शव उसके पिता को सौंप दिया, जबकि इस घटना को लेकर राज्यव्यापी आक्रोश फैल गया है और विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया गया।
शहर में स्थित कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (केआईआईटी) में बीटेक (कंप्यूटर साइंस) तृतीय वर्ष की छात्रा प्रकृति लम्साल (20) ने रविवार दोपहर को छात्रावास के कमरे में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी, जिसके बाद परिसर में अशांति फैल गई।
लड़की के पिता सुनील लम्साल अपने दोस्तों के साथ यहां पहुंचे और शव के पोस्टमार्टम के दौरान मौजूद रहे। सुनील ने बताया कि वे शव को नेपाल ले जाने की योजना बना रहे हैं।
भुवनेश्वर के डीसीपी पिनाक मिश्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “पुलिस ने दो मामले दर्ज किए हैं, एक लड़की के चचेरे भाई से मिली शिकायत के आधार पर, फांसी लगाकर आत्महत्या करने के संबंध में और दूसरा सोशल मीडिया वीडियो को लेकर, जिसमें निजी विश्वविद्यालय के सुरक्षाकर्मी और कर्मचारी घटना पर विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के साथ दुर्व्यवहार व पिटाई करते दिख रहे हैं।”
पुलिस ने रमाकांत नायक (45) और जोगेंद्र बेहरा (25) नामक दो सुरक्षा कर्मियों को भी गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय सहिंता (बीएनएस) की धारा 126 (2) [गलत तरीके से रोकना], 296 [अश्लील हरकतें], 115 (2) [स्वेच्छा से चोट पहुंचाना] आदि के तहत मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों ने दावा किया कि फुटेज में इन सुरक्षा कर्मियों को धरना देकर लड़की के लिए न्याय की मांग कर रहे छात्रों के साथ मारपीट करते हुए देखा गया।
इस बीच, केआईआईटी के अधिकारियों के माफी मांगने के बावजूद, छात्रों ने परिसर में "मौन धरना" दिया और दो महिला अधिकारियों से व्यक्तिगत माफी की मांग की, जिन्होंने कथित तौर पर नेपाली छात्रों और छात्रावास में रहने वाले दूसरे छात्रों का अपमान किया था।
छात्रों की मांग मानते हुए, दो महिला अधिकारियों, जानति नाथ और मंजूषा पांडे ने केआईआईटी के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक वीडियो संदेश जारी किया और माफी मांगी।
संस्थान में विदेशी छात्रों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए लड़की के पिता ने दिन में कहा, “उन्होंने (केआईआईटी) छात्रों को संस्थान आने के लिए आमंत्रित किया और सभी तरह की सुरक्षा का आश्वासन दिया। हालांकि, यहां चीजें अलग हैं। मैंने अपनी बेटी को उच्च शिक्षा के लिए भेजा था, लेकिन यहां जो हुआ वह स्वीकार्य नहीं है। मुझे सरकार से न्याय मिलने की उम्मीद है।”
लड़की के पिता ने कुछ नेपाली छात्रों को छात्रावास से जबरन निकाले जाने और उनकी वापसी यात्रा की व्यवस्था किए बिना रेलवे स्टेशन पर छोड़े जाने से संबंधित पत्रकारों के एक सवाल का जवाब देते हुए यह बात कही।
इस बीच, ओडिशा सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया।
टीम के अन्य सदस्य उच्च शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव हैं।
उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज ने पत्रकारों से कहा, “संस्था को नोटिस के तहत रखा गया है, और उच्च स्तरीय टीम के निष्कर्षों के आधार पर उचित कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।”
उन्होंने कहा कि केआईआईटी अधिकारियों ने छात्रा की मौत और उसके बाद नेपाली छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में राज्य सरकार को सूचित नहीं किया था।
मंत्री ने कहा कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग की जांच की जा रही है, और जिम्मेदार लोगों को कानून के अनुसार जवाबदेह ठहराया जाएगा।
मंत्री ने कहा, “ओडिशा सरकार प्रत्येक छात्र की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी कि न्याय तेजी से और निष्पक्ष रूप से मिले।
मंत्री ने कहा कि सरकार ने संस्थान के अधिकारियों को संस्थान से निकाले गए सभी नेपाली छात्रों को वापस लाने का निर्देश दिया गया है।
सूरज ने सवाल किया, “नेपाली छात्रों को कटक रेलवे स्टेशन पर क्यों उतार दिया गया? संस्थान के अधिकारियों ने घटना के बारे में सरकार को सूचित क्यों नहीं किया, जबकि इसमें विदेशी छात्र शामिल थे?”
उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 नेपाली छात्र परिसर में हैं, 800 अपने घरों के लिए रवाना हो गए हैं।
इस बीच, यह मुद्दा राज्य विधानसभा में भी उठा, जहां सभी दलों के विधायकों ने छात्रा की मौत और उसके बाद पड़ोसी देश के छात्रों को छात्रावास से निकाले जाने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की।
सभी सदस्यों ने स्वीकार किया कि केआईआईटी में हुईं घटनाओं से राज्य की छवि खराब हुई है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
एक ओर, कांग्रेस ने छात्रा की मौत और छात्रों पर कथित अत्याचार से संबंधित मामले की न्यायिक जांच की मांग की, तो वहीं भाजपा सदस्यों ने केआईआईटी के संस्थापक अच्युता सामंत की गिरफ्तारी की मांग की।
बीजू जनता दल (बीजद) ने कहा कि यह घटना भाजपा शासित ओडिशा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति का परिणाम है। इस घटना के बाद नेपाल में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया, वहां के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने प्रभावित छात्रों को कुछ राहत देने की पेशकश की।
अधिकारियों ने कहा कि दिल्ली में नेपाल दूतावास के दो अधिकारी संस्थान का दौरा कर सकते हैं।
ओली ने सोमवार को 'फेसबुक' पर लिखा था, "मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी मिली है कि ओडिशा के केआईआईटी विश्वविद्यालय के छात्रावास में एक नेपाली छात्रा की मौत हो गई है और नेपाली छात्रों को जबरन बाहर निकाला गया है। सरकार इस मामले को राजनयिक माध्यमों से देख रही है और संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।"
भाषा जोहेब