दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंजीनियर रशीद की अभिरक्षा पैरोल की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
सुरभि संतोष
- 07 Feb 2025, 05:24 PM
- Updated: 05:24 PM
नयी दिल्ली, सात फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में मुकदमे का सामना कर रहे जेल में बंद सांसद रशीद इंजीनियर की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सांसद ने संसद के मौजूदा सत्र में हिस्सा लेने के लिए अभिरक्षा पैरोल का अनुरोध किया था।
न्यायमूर्ति विकास महाजन ने बारामूला से सांसद तथा राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की ओर से पेश हुए वकीलों की दलीलें सुनीं और कहा, ‘‘फैसला सुरक्षित रखा जाता है।’’
एनआईए की ओर से पेश हुए वकील ने अभिरक्षा पैरोल दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि रशीद को संसद में उपस्थित होने का कोई अधिकार नहीं है।
एनआईए के वकील ने कहा कि राहत का अनुरोध करते समय सांसद ने कोई ‘‘विशिष्ट उद्देश्य’’ नहीं बताया है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी हैं।
अभिरक्षा पैरोल के तहत कैदी को सशस्त्र पुलिस कर्मियों द्वारा उक्त स्थान तक ले जाया जाता है।
न्यायमूर्ति महाजन ने कहा कि सत्र में भाग लेना कोई निहित अधिकार नहीं है, फिर भी अदालत अपने विवेक का प्रयोग कर सकती है।
जांच एजेंसी के वकील ने वर्तमान परिस्थितियों को उन मामलों से अलग बताया, जहां विवाह या शोक के संदर्भ में अभिरक्षा पैरोल दी गई थी और कहा कि यहां एक संप्रभु तीसरे पक्ष यानी संसद के मानदंड शामिल हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी, ‘‘उनके साथ सशस्त्र कर्मियों का होना जरूरी है। आप सशस्त्र कर्मियों को संसद में कैसे प्रवेश दे सकते हैं? (संसद में) हथियार लेकर कोई भी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। वह (संसद) एक अलग संस्था के मानदंडों के अधीन हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सुरक्षा संबंधी मुद्दे एनआईए के अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं। अभिरक्षा पैरोल किसी सांसद का निहित अधिकार नहीं है।’’
रशीद के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने कहा कि उनके मुवक्किल को संसद के मौजूदा सत्र में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि बजट सत्र के दौरान उनके निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा है, जबकि उनके राज्य को आवंटित धनराशि में 1,000 करोड़ रुपये की कमी की गई है।
सांसद पप्पू यादव के मामले का जिक्र करते हुए हरिहरन ने कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा ‘‘आवश्यक व्यवस्था’’ की जा सकती है।
सांसद की ओर से पेश हुए वकील ने उनके हवाले से दलील दी, ‘‘मैं (इंजीनियर रशीद) जम्मू कश्मीर के सबसे बड़े निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूं। निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को नहीं रोकें... निर्वाचन क्षेत्र की आवाज को न दबाएं।’’
हरिहरन ने कहा कि रशीद को पहले भी लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करने और सांसद पद की शपथ लेने की छूट दी गई थी। ऐसे में अब वह संसद में सुरक्षा के लिए खतरा कैसे बन सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कैसे कर सकते हैं।
हालांकि लूथरा ने कहा कि इस समय रशीद को सत्र में शामिल होने देने का कोई ‘‘उद्देश्य’’ नहीं बचा है और पिछले संसद सत्र में शामिल होने की उनकी पिछली याचिका भी खारिज कर दी गई थी।
लूथरा ने कहा, ‘‘आज क्या उद्देश्य है? बजट पेश किया गया। उन्हें चर्चा के लिए जाना था। चर्चा आंशिक रूप से हो रही है। क्या उन्होंने कुछ किया है... सिवाय इसके कि वह अनशन पर बैठे हैं और उन्हें आरएमएल भेज दिया गया है।’’
उन्होंने स्पष्ट किया कि रशीद को शपथ लेने की अनुमति देना एक ‘‘अलग मुद्दा’’ था और अरविंद केजरीवाल के मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर उन्हें चुनाव प्रचार करने की अनुमति दी गई थी।
एनआईए के वकील ने कहा कि उनके पिछले आचरण की जांच की जानी चाहिए और आरोप लगाया कि रशीद ने तिहाड़ जेल में टेलीफोन सुविधा का दुरुपयोग किया।
अदालत रशीद की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि पिछले साल लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही एनआईए अदालत ने उन्हें इस आधार पर अधर में छोड़ दिया कि यह विशेष सांसद/विधायक (एमपी/एमएलए) अदालत नहीं है।
अपनी याचिका में रशीद ने उच्च न्यायालय से अनुरोध किया कि या तो वह एनआईए अदालत द्वारा उनकी लंबित जमानत याचिका का शीघ्र निपटारा करने का निर्देश दे या फिर मामले में खुद फैसला करे। उन्होंने संसद के बजट सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत का भी अनुरोध किया। संसद के बजट सत्र की कार्यवाही 31 जनवरी को शुरू हुई और सत्र चार अप्रैल को समाप्त होगा।
इससे पहले, एनआईए ने संसद सत्र में भाग लेने के लिए अंतरिम जमानत के अनुरोध वाली रशीद की याचिका का विरोध किया था और कहा था कि एक सांसद के रूप में उनके पास ऐसा कोई ‘‘अधिकार’’ नहीं है।
सांसद ने संसद के पहले सत्र में हिस्सा लेने के लिए छह फरवरी को अभिरक्षा पैरोल का अनुरोध किया था। संसद का पहला सत्र 13 फरवरी को खत्म होने वाला है।
जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए अदालत के निर्धारण के मुद्दे पर उच्च न्यायालय प्रशासन के वकील ने कहा कि इस संबंध में उनकी याचिका प्रक्रिया के अनुसार उच्चतम न्यायालय में सूचीबद्ध की गई है और इस पर 10 फरवरी को सुनवाई होने की संभावना है।
मुख्य याचिका के जवाब में एनआईए ने कहा है कि सांसद होने के नाते रशीद एक ‘‘अत्यधिक प्रभावशाली व्यक्ति’’ हैं जो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और मुकदमे में बाधा डाल सकते हैं। याचिका में कहा गया है कि मुकदमा पर सुनवाई जारी है और 248 गवाहों में से अभियोजन पक्ष के 21 गवाहों से अब तक जिरह हो चुकी है तथा अभियोजन पक्ष की ओर से कोई देरी नहीं की जा सकती।
रशीद वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। धन शोधन से जुड़े एक मामले में जांच के सिलसिले में एनआईए द्वारा 2017 में देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने से संबंधित गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में नाम सामने आने के बाद सांसद को 2019 में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख और नामित आतंकवादी हाफिज सईद का भी नाम आरोपी के रूप में दर्ज है।
एनआईए की प्राथमिकी के अनुसार, रशीद के खिलाफ जम्मू कश्मीर में अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए अवैध तरीकों से धन जुटाने, प्राप्त करने और इकट्ठा करने और सुरक्षा बलों पर पथराव, स्कूलों को जलाने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने एवं भारत के खिलाफ युद्ध छेड़कर घाटी में अशांति पैदा करने का मामला दर्ज किया गया था। व्यवसायी और सह-आरोपी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान रशीद का नाम सामने आया।
रशीद और अन्य के खिलाफ 2022 में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 124 ए (राजद्रोह) और आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्यों एवं आतंकवाद के वित्तपोषण से संबंधित अपराधों के लिए आरोप तय किए गए थे।
भाषा सुरभि