देश में सीएए लागू, विपक्ष ने इसे ‘चुनावी बॉण्ड’ समेत विभिन्न मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला बताया
रंजन रंजन दिलीप
- 11 Mar 2024, 10:58 PM
- Updated: 10:58 PM
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा चुनाव से पहले सोमवार को संशोधित नागरिकता कानून लागू करने के बाद विपक्षी दलों ने जहां इसे विभाजनकारी और सांप्रदायिक कदम तथा मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला करार दिया, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने इस कदम का स्वागत किया है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को सीएए पर केंद्र सरकार की अधिसूचना की निंदा की और इसे पूरी तरह से सांप्रदायिक उद्देश्यों के साथ विभाजनकारी और नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया।
थरूर ने कहा, ‘‘यह मूल सिद्धांत के विपरीत है कि भारत में, आपका धर्म कुछ भी हो, आपकी जाति कुछ भी हो, आपकी भाषा कुछ भी हो, आपका रंग कुछ भी हो, आप देश के किसी भी हिस्से में रहते हों, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि आप भारत के नागरिक हैं, तो आपके पास अन्य सभी लोगों के समान अधिकार हैं।’’
उधर, शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा कि सीएए लागू किया जा रहा है, क्योंकि सत्तारूढ़ सरकार को एहसास है कि लोकसभा चुनाव से पहले समर्थन की कोई लहर नहीं है।
राउत ने दावा किया, ‘‘केंद्र सरकार चाहे कितने भी सांप्रदायिक या अन्य प्रकार के तनाव पैदा कर ले, नरेन्द्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे।’’
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि नरेन्द्र मोदी नीत सरकार द्वारा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को लागू करने का निर्णय चुनावी बॉण्ड पर विवाद से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए है।
इस कानून को पारित किये जाने के चार साल बाद केंद्र के इस कदम के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आने वाले गैर-मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुये तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजनीतिक लाभ हासिल करने के प्रयास में लोकसभा चुनाव से पहले सीएए के नियमों को अधिसूचित करके "अपने डूबते जहाज को बचाने" की कोशिश कर रहे हैं।
स्टालिन ने कहा कि भाजपा सरकार के "विभाजनकारी एजेंडे" ने नागरिकता अधिनियम को हथियार बना दिया है, इसे "मानवता के प्रतीक" से धर्म और नस्ल के आधार पर "भेदभाव के उपकरण" में बदल दिया है।
हालांकि, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने सोमवार को कहा कि सीएए के नियमों को अधिसूचित करना ‘‘भारत में सुशासन’’ का एक उदाहरण है।
बोस ने कहा कि इसे चार साल पहले संसद में पारित किया गया था और अब जो हो रहा है वह नियमों और विनियमों की अधिसूचना के माध्यम से इसकी ‘‘तार्किक परिणति’’ है।
राज्यपाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं इसे इस देश में सुशासन की सामान्य प्रक्रिया के एक हिस्से के रूप में देखता हूं।’’
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि केंद्र द्वारा नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के नियमों को अधिसूचित करना राजनीति से प्रेरित है, जो आगामी लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह कदम चुनाव में अधिक सीट जीतने और सत्ता में आने को लेकर भाजपा के आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है।
परमेश्वर ने कहा, ‘‘आज नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के नियम गजट में प्रकाशित हो गये हैं । मुझे लगता है कि इसका पूरा विवरण देखे बिना इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। हमने 2019 में देखा कि कई लोगों ने इसका विरोध किया था। इसके बावजूद अगर केंद्र सरकार इस फैसले पर पहुंची है, तो इसकी जांच की जानी चाहिए और इस पर गौर किया जाना चाहिए ।’’
नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को भेदभावपूर्ण करार देते हुये एमनेस्टी इंडिया ने कहा कि यह कानून समानता के अधिकार का उल्लंघन है और समानता एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों के संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
कानून की अधिसूचना के बाद एमनेस्टी इंडिया ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘नागरिकता (संशोधन) अधिनियम भेदभावपूर्ण है, जो समानता के संवैधानिक मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के खिलाफ है।’’
उधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, ‘‘मोदी सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के नियमों को अधिसूचित कर पड़ोसी देशों में शोषित अल्पसंख्यकों के हितों एवं उनके विकास के लिए भारत के दरवाजे खोल दिये हैं।’’
उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इसके तहत अब तीन पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता मिल सकेगी। मैं इसके लिए माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी को शुभकामनाएं प्रदान करता हूं।’’
भाजपा की छत्तीसगढ़ इकाई ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘भाजपा जो कहती है, वह करती है, देश में आज सीएए लागू हो गया है।
इस बीच, प्रदेश कांग्रेस ने दावा किया कि मोदी सरकार ने अपनी विफलताओं से लोगों का ध्यान हटाने के लिए सीएए के नियमों को अधिसूचित किया है।
ओड़िशा में कांग्रेस, माकपा और सपा जैसे विपक्षी दलों ने चुनाव से पहले इस कानून के कार्यान्वयन पर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की, जबकि भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसके लिये धन्यवाद दिया।
ओडिशा विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता, नरसिंह मिश्रा ने कहा कि देश की एक बड़ी आबादी ने सीएए का "कड़ा विरोध" किया था, जिसके कारण इसके कार्यान्वयन में देरी हुई।
सीएए के नियमों को अधिसूचित करके एक और वादा पूरा करने के लिए भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया ।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, "सीएए का कार्यान्वयन भारतीयता और करुणा, सद्भाव, समावेशिता और भाईचारे के सभ्यतागत लोकाचार का सच्चा प्रतिबिंब होगा।"
केंद्र द्वारा सोमवार को सीएए के नियमों को अधिसूचित करने के साथ ही, जम्मू में बसे रोहिंग्या शरणार्थियों के पुनर्वास की मांग सामने आ गई है और कुछ राजनीतिक दल एवं सामाजिक संगठन अपनी मांग पूरी करने की वकालत कर रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे मतदाताओं के ध्रुवीकरण का कदम बता रहा है।
हालांकि, प्रदेश भाजपा ने इस कदम का स्वागत किया है।
गुजरात के भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने सोमवार को नागरिकता (संशोधन) अधिनयम के नियमों को अधिसूचित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी।
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री दर्शना जरदोश ने इसके लिए मोदी और शाह की सराहना की और कहा कि सीएए का कार्यान्वयन भाजपा के 2019 (लोकसभा चुनाव) घोषणापत्र का एक अभिन्न अंग था।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मोदी की गारंटी का मतलब हर गारंटी को पूरा करने की गारंटी है।’’
मंत्री ऋशिकेश पटेल ने कहा कि गुजरात के लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हैं और राज्य सरकार देश हित में लिए गए केंद्र सरकार के फैसले को लागू करेगी।
इस बीच, मेघालय में विपक्षी वॉयस ऑफ पीपुल्स पार्टी (वीपीपी) ने कहा कि वह नागरिकता (संशोधन) अधिनियम का विरोध करती है, जिसे मेघालय के उन इलाकों में लागू किया जाएगा, जो छठी अनुसूची के तहत नहीं हैं।
असम में विपक्षी दलों ने सोमवार को इस कानून को लागू करने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना की, हालांकि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इसका स्वागत किया है, जिससे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आये अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता देने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
दूसरी ओर, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने कहा कि वह केंद्र के इस कदम के खिलाफ कानूनी रूप से लड़ेगा।
आसू एवं 30 अन्य संगठनों ने सोमवार को राज्य के गुवाहाटी, बरपेटा, लखीमपुर, नलबाड़ी, डिब्रूगढ़ और तेजपुर सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में नागरिकता (संशोधन) अधिनियम की प्रतियां जलाईं।
केरल के सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने सीएए लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की और इसे चुनावी बॉण्ड जैसे मौजूदा मुद्दों से ध्यान भटकाने के उद्देश्य से उठाया गया एक रणनीतिक कदम करार दिया।
भाषा रंजन रंजन