कुलपतियों नियुक्ति का अधिकार, विश्वविद्यालयों का नियंत्रण मुख्यमंत्री के पास होना चाहिए: स्टालिन
आशीष माधव
- 21 Jan 2025, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
(फाइल फोटो सहित)
कराईकुडी (तमिलनाडु), 21 जनवरी (भाषा) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने मंगलवार को कहा कि विश्वविद्यालयों का प्रशासन राज्य सरकार के पूर्ण नियंत्रण में होना चाहिए तथा इसके कुलपतियों की नियुक्ति का अधिकार भी मुख्यमंत्री के पास होना चाहिए।
स्टालिन ने केंद्र और राज्यपाल पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि राज्य के शिक्षा अधिकारों को बहाल करने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।
राज्यपाल राज्य संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी होते हैं।
तमिलनाडु में कुल 20 विश्वविद्यालय हैं जिनमें से कुछ में कुलपति के पद खाली पड़े हैं। कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नीत सत्तारूढ़ सरकार का राज्यपाल के साथ टकराव चल रहा है।
स्टालिन ने यहां ‘‘तिरुमति लक्ष्मी वलार तमिल’’ पुस्तकालय का उद्घाटन करने के बाद कहा, ‘‘तमिलनाडु सरकार राज्य विश्वविद्यालयों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करती है। हमारा सवाल है कि क्या कुलाधिपति का पद केवल केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के लिए आरक्षित होना चाहिए?’’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने शिवगंगा जिले के कराईकुडी स्थित अलगप्पा विश्वविद्यालय में अपनी मां के नाम पर 12 करोड़ रुपये की लागत से तमिल पुस्तकालय की स्थापना की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात में 49 प्रतिशत से अधिक के साथ भारत में शीर्ष स्थान पर है और यह राष्ट्रीय औसत से दोगुना है। उन्होंने कहा कि राज्य उच्च शिक्षा में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त कर रहा है।
स्टालिन ने कहा, ‘‘इसलिए हम कह रहे हैं कि विश्वविद्यालयों का प्रशासन राज्य सरकार के पूर्ण नियंत्रण में होना चाहिए और कुलपतियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जानी चाहिए, जिन्हें जनता द्वारा चुना जाता है।’’
स्टालिन ने कहा कि राज्य के शैक्षिक अधिकार बहाल होने तक कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जारी रहेगी।
चिदंबरम की इस पहल की सराहना करते हुए स्टालिन ने लोगों से आग्रह किया कि वे जहां भी संभव हो, पुस्तकालय या अध्ययन केंद्र स्थापित करें और ज्ञान के प्रसार में मदद करें। उन्होंने तमिल पुस्तकालय को जल्द ही 1,000 पुस्तकें उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं चिदंबरम को चलता-फिरता पुस्तकालय मानता हूं। वह ज्ञान का खजाना हैं और राजनीति, इतिहास, कानून, अर्थशास्त्र एवं साहित्य सहित विविध क्षेत्रों का उनके पास गहरा ज्ञान है।’’
इस अवसर पर चिदंबरम ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें छोटी उम्र में तमिल और अंग्रेजी किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया।
भाषा आशीष