इस साल अब तक 21,000 से अधिक चार धाम श्रद्धालुओं ने उठाया हेलीकॉप्टर सेवाओं का लाभ
जोहेब
- 12 May 2026, 04:51 PM
- Updated: 04:51 PM
(इंट्रो से एक शब्द हटाते हुए रिपीट)
देहरादून, 12 मई (भाषा) उत्तराखंड नागर विमानन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) की आधुनिक निगरानी प्रणाली की मदद से चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाओं का संचालन किया जा रहा है और 22 अप्रैल से अब तक 21,000 से अधिक श्रद्धालु इनका लाभ उठा चुके हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि फाटा, गुप्तकाशी और सिरसी से संचालित शटल सेवाओं के जरिए 17,976 यात्रियों को दर्शन कराए गए जबकि चार्टर्ड सेवाओं के माध्यम से 10 मई तक 3,974 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
अधिकारियों के अनुसार, यहां स्थित सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट में स्थापित एकीकृत कमान एवं नियंत्रण एवं संचार केंद्र (आईसीसीसीसी) खराब मौसमी परिस्थितियों में भी हेलीकॉप्टर सेवाओं की हर गतिविधि पर सतत निगरानी बनाए हुए है।
इस केंद्र में तैनात नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और यूसीएडीए की छह सदस्यीय संयुक्त टीम द्वारा हवाई यातायात नियंत्रण (एटीसी) के साथ समन्वय स्थापित करके शटल सेवा की हर समय निगरानी की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि सभी हेलीकॉप्टर सेवा से जुड़े मार्गों पर स्थापित पीटीजेड कैमरों के माध्यम से हेलीकॉप्टरों के आगमन और प्रस्थान पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई संभव हो सके।
यूसीएडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों के अनुरूप चारधाम हेलीकॉप्टर यात्रा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से अधिक सुरक्षित, सरल और सुव्यवस्थित बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "प्रत्येक हेलीकॉप्टर उड़ान की सक्रिय निगरानी की जा रही है तथा एटीसी के साथ समन्वय स्थापित करके प्रत्येक शटल सेवा को मंजूरी दी जा रही है। खराब मौसम, दृश्यता और सुरक्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सभी हेली सेवाओं पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
इस वर्ष की चार धाम यात्रा 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पर्व से शुरू हुई थी जब उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे।
रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ मंदिर के कपाट 22 अप्रैल को तथा चमोली जिले में स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले गए थे।
भाषा दीप्ति जोहेब
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