डेयरी क्षेत्र में एक दशक में 70 प्रतिशत की प्रतिशत वृद्धि: शाह
रमण
- 01 May 2026, 04:29 PM
- Updated: 04:29 PM
लेह/जम्मू, एक मई (भाषा) केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पद संभालने के बाद देश के पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है और सिर्फ एक दशक में दूध उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
शाह ने शुक्रवार को लद्दाख में डेयरी क्षेत्र में कुछ परियोजनाओं की नींव रखी और अन्य का उद्घाटन किया। साथ ही लद्दाख और करगिल में डेयरी क्षेत्र के बड़े विस्तार की योजनाओं की घोषणा की, जिसमें लेह में 50,000 लीटर प्रतिदिन की दूध प्रसंस्करण क्षमता वाला संयंत्र स्थापित करना शामिल है।
उन्होंने डेयरी क्षेत्र की कई परियोजनाओं की शुरुआत के अवसर पर कहा, '' 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश के पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन हुआ है। पशुपालन के लिए अलग विभाग बनाए जाने से कई क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं।''
शाह ने कहा कि देश का दूध उत्पादन 2014-15 में 14.3 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 24.8 करोड़ टन हो गया है, जो 10 वर्ष में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि है।
उन्होंने कहा, '' इस वृद्धि का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा पिछले पांच वर्षों में हासिल किया गया है।''
मंत्री ने दूध को विशेषकर बच्चों के लिए पोषण का एक आवश्यक स्रोत बताते हुए कहा कि प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 2014 में 307 ग्राम प्रतिदिन से बढ़कर वर्तमान में लगभग 485 ग्राम हो गई है।
उन्होंने कहा, '' पाश्चुरीकृत दूध बच्चों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।''
गृह मंत्री ने उम्मीद जताई कि लद्दाख भी प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 485 ग्राम दूध उपलब्धता के राष्ट्रीय औसत को हासिल करेगा जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पोषण सुनिश्चित होगा।
उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दूध पाउडर का उत्पादन भी 2014-15 में 15,00 टन से बढ़कर लगभग 24,000 मीट्रिक टन हो गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच वर्षों में 75,000 नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित करने का लक्ष्य रखा है जिनमें से 21,000 से अधिक पहले ही बनाई जा चुकी हैं।
मंत्री ने लद्दाख प्रशासन से स्थानीय जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पशुपालन के लिए उपयुक्त गांवों की पूरी क्षमता का उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्र में जैविक खेती और शहद उत्पादन जैसे संबद्ध क्षेत्रों में सहकारी-आधारित विकास को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया।
शाह ने कहा कि ऐसे कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाएंगे बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेंगे और लद्दाख में सतत विकास में योगदान देंगे।
मंत्री ने साथ ही कहा कि सरकार लद्दाख और कारगिल में डेयरी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि डेयरी किसानों की स्थायी आजीविका सुनिश्चित हो सके और उनकी आय में वृद्धि हो सके।
शाह ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ एकीकरण के बाद, लद्दाख मिल्क फेडरेशन का विस्तार 28 गांवों तक किया जाएगा।
स्थानीय लोगों को बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए मंत्री ने कहा कि भगवान बुद्ध की शिक्षाएं, विशेष रूप से ''अप्पो दीपो भव'' (स्वयं अपना प्रकाश बनो) का संदेश, लोगों को आत्मनिर्भरता और उच्च उद्देश्य की ओर प्रेरित करता रहता है।
उन्होंने कहा, '' हम लद्दाख तथा करगिल में बुनियादी ढांचे को और मजबूत करने के लिए भी काम कर रहे हैं। आने वाले दिनों में, लेह में लगभग 50,000 लीटर प्रतिदिन की प्रसंस्करण क्षमता वाला एक नया डेयरी संयंत्र लगभग 70 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्थापित किया जाएगा।''
शाह ने कहा कि स्थानीय जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल उच्च उपज वाली नस्लों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लेह और करगिल में लगभग चार करोड़ रुपये प्रति केंद्र की लागत से पशु प्रजनन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, '' क्षेत्र में अगले दशक में पशुधन की संख्या को लगभग तीन गुना करने के दीर्घकालिक लक्ष्य के साथ, प्रतिवर्ष लगभग 500 उन्नत नस्ल के पशुओं को लाने की योजना है।''
करगिल की महिलाओं को बधाई देते हुए शाह ने कहा कि इस पहल से उन्हें आत्मनिर्भर बनने और आजीविका में सुधार करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि 25 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित की जा रही इस नई परियोजना से स्थानीय परिवारों को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है।
शाह ने कहा कि मौजूदा दुग्ध संघ ने पहले ही प्रतिदिन लगभग 500 किलो पनीर और 1,000 किलो दही का उत्पादन शुरू कर दिया है। आधुनिकीकरण के साथ उत्पादन और भी अधिक कुशल हो जाएगा।
उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण में सुधार के लिए मोबाइल दूध परीक्षण सुविधाओं की शुरुआत और खरीद कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी आधारित डिजिटल स्वचालित दूध संग्रहण प्रणाली (एएमसीएस) की शुरुआत की भी घोषणा की।
भाषा निहारिका रमण
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