हम किसान उसको मानते हैं जो हल चलाता है: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया मैनेजर
/Daily World
- 27 Jul 2024, 01:17 PM
- Updated: 01:17 PM
मुकेश कुमार त्रिपाठी / राहुल चौबे / रामगढ़वा / मोतिहारी (बिहार)
"यदि आप खेत नहीं जोतते हैं, तो आप किसान नहीं हैं। किसान वही है जो हल चलता है।" इस आधुनिक युग में जहां किसान खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर रहे हैं, बिहार में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के एक प्रबंधक द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण आवेदनों को अस्वीकार करने के संभावित आधार के रूप में पेश की गई 'किसान' की इस विचित्र परिभाषा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना पर सवालिया निशान लगा दिया है।
सेंट्रल बैंक ने पटनी शाखा प्रबंधक विक्रम सिंह द्वारा दिए जा रहे अपने वक्तव्य से खुद को दूर कर लिया है, लेकिन उनके निराधार दोनों, बयानों, उपभोक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार करने और पुलिस बुलाने के मामले में कई लिखित शिकायतों के बावजूद पटनी प्रबंधक के खिलाफ कोई सार्थक कार्रवाई नहीं कर अपने विश्वसनीयता पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।
डेली वर्ल्ड द्वारा सेंट्रल बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ एम.वी.राव को भेजे गए सवालों का जवाब देते हुए बैंक प्रबंधन ने कहा: "हम बैंक के किसी भी शाखा अधिकारी द्वारा दिए गए किसान के बारे में ऐसे बयान या परिभाषा से सहमत नहीं हैं। हमने पटनी शाखा प्रमुख विक्रम सिंह को इस प्रकार के बयान न देने की सलाह दी है।"
लगभग तीन महीने पहले, विक्रम सिंह ने सेंट्रल बैंक के शीर्ष प्रबंधन द्वारा जारी परिपत्रों (सर्कुलर) और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए प्रत्येक कार्य दिवस पर दोपहर 3.30 बजे बैंक बंद करने का आदेश दिया था। इस बारे में उन्होंने बैंक के सामने एक नोटिस बोर्ड भी लगाया था।
कई उपभोक्ताओं द्वारा समय के इस बदलाव पर आपत्ति जताया था। इसके बावजूद, सेंट्रल बैंक के शीर्ष प्रबंधन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए पटनी शाखा प्रबंधक सिंह ने यह नोटिस बोर्ड लगा कर रखा जिसमें कहा गया था कि बैंक केवल कार्य दिवसों पर सुबह 10 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक खुला रहेगा। उपभोक्ताओं ने बैंक के शीर्ष प्रबंधन से यह भी शिकायत की कि सिंह ने दोपहर 3.30 बजे के बाद आने वाले कई उपभोगताओं को बैंक परिसर से बाहर निकाल दिया, जिसके कारण लंबे समय से बैंक बंद करने को लेकर उपभोगताओं के साथ लड़ाई-झगड़ा की नौबत आ गई।
सीबीआई शीर्ष प्रबंधन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पूर्वी चंपारण जिले के रामगढ़वा में स्थित पटनी शाखा, "अर्ध-शहरी क्षेत्र" की श्रेणी में आता है और "अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक सेंट्रल बैंक शाखा के लिए सामान्य कार्य समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक है जबकि नकद लेनदेन जैसे व्यावसायिक समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक है"।
यहाँ के ग्रामीण, खास कर किसानों से हो रहे दुर्व्यवहार और पटनी सेंट्रल बैंक नियत समय से पहले बैंक करने की मामले में डेली वर्ल्ड ने एक समाचार प्रकाशित किया था जिसके बाद, मोतिहारी के क्षेत्रीय प्रबंधक नरेश ठाकुर ने पटनी बैंक का दौरा किया और नोटिस बोर्ड पर अंकित कामकाज का समय सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक बदलवा दिया। उन्होंने उपभोक्ताओं से खेद व्यक्त किया और उन्हें आश्वासन दिया कि बैंक मैनेजर के कार्यकलाप में अब सुधार दिखेगा।
हालाँकि, एक दिन बाद ही, विक्रम सिंह ने यह दावा करके कि उनके पास सीबीआई के जोनल मैनेजर और रीजनल मैनेजर के खिलाफ सबूत हैं, फिर से एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। हरियाणा के कैथल में कृषि लोन देने में हुए अनियमितताओं को लेकर उनके खिलाफ विजिलेंस केस के बारे में पूछे जाने पर, विक्रम सिंह ने कहा: ह्लयह एक गोपनीय डाटा है। जिसने भी "टेलेफोनिकली" यह जानकारी साझा की है, मैं उनके खिलाफ कार्रवाई करूंगा। "मेरे पीछे जोनल मैनेजर और रीजनल मैनेजर आदि पड़े हैं, और उनके खिलाफ मेरे पास सभी सबूत हैं।"
ज्ञात हो कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ साल पहले किसानों को उनकी जोत के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड योजना को जोर-शोर से लागू करने का आह्वान किया था ताकि किसान बीज, उर्वरक, कीटनाशक आदि जैसे कृषि आदानों को आसानी से खरीदने के लिए इस पैसे का उपयोग कर सकें। केसीसी लोन योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी खेती और अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए लचीली और सरलीकृत प्रक्रियाओं के तहत बैंकिंग प्रणाली से पर्याप्त और समय पर ऋण मुहैया कराना है।
पटनी बैंक के उपभोगताओं ने को बताया कि रामगढ़वा में सेंट्रल बैंक मैनेजर विक्रम सिंह न केवल अपनी मनमर्जी के आधार पर किसानों को ऋण देने से इनकार कर रहे थे, बल्कि जब भी उनके द्वारा बैंक को नियत समय से बंद करने और दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की तब बैंक मैनेजर द्वारा उन्हें पुलिस बुलाने की धमकी दी गई।
उन्होंने शाखा प्रबंधक के खिलाफ सख्त कार्यवाई की मांग हुए कहा कि विक्रम सिंह ने न केवल सेंट्रल बैंक का नाम खराब किया है बल्कि भारत में 'किसान' के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह लगा दिया है।